सीएम धामी ने गढी *एक समावेशी नेतृत्व की नई परिभाषा*
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने कार्यकाल के दौरान ‘समावेशी नेतृत्व’ (Inclusive Leadership) की एक ऐसी परिभाषा गढ़ी है, जो विकास और परंपरा के संतुलन पर आधारित है। उनके नेतृत्व को अक्सर “कठोर निर्णय और कोमल हृदय” का मिश्रण माना जाता है।
सीएम धामी द्वारा स्थापित समावेशी नेतृत्व के प्रमुख बातें
1. ‘अंतिम छोर’ तक पहुंच (Antyodaya)
धामी सरकार का मुख्य फोकस समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाना रहा है। चाहे वह पहाड़ी दूरस्थ क्षेत्रों में होमस्टे योजना को बढ़ावा देना हो या महिला स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना, उनका दृष्टिकोण सबको साथ लेकर चलने का है।
2. युवाओं और महिलाओं का सशक्तिकरण
सीएम धामी ने प्रदेश के युवाओं के लिए देश का सबसे सख्त ‘नकल विरोधी कानून’ लागू किया, जो एक समावेशी और पारदर्शी व्यवस्था बनाने की दिशा में बड़ा कदम था। साथ ही, उत्तराखंड में महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 30% क्षैतिज आरक्षण (Horizontal Reservation) देकर उन्होंने नारी शक्ति को शासन की मुख्यधारा से जोड़ा।
3. समान नागरिक संहिता (UCC)
समावेशी नेतृत्व का सबसे बड़ा उदाहरण समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पारित करना है। धामी ने इसे “सबका साथ, सबका विकास” के मंत्र का विस्तार बताया, जिसका उद्देश्य धर्म और जाति से ऊपर उठकर सभी नागरिकों (विशेषकर महिलाओं) को समान अधिकार और सुरक्षा प्रदान करना है।
4. धार्मिक विरासत और आधुनिक विकास (Vikas bhi, Virasat bhi)
उनके नेतृत्व में ‘केदारखंड’ (केदारनाथ-बद्रीनाथ पुनरुद्धार) के साथ-साथ ‘मानसखंड’ (कुमाऊं के मंदिरों का विकास) मंदिर माला मिशन पर काम हो रहा है। यह समावेशिता का ही रूप है कि वे केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि राज्य की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को भी समान महत्व दे रहे हैं।
5. संवाद आधारित शासन
मुख्यमंत्री धामी की कार्यशैली में ‘जन संवाद’ का विशेष महत्व है। वे अक्सर गांवों में जाकर रात्रि विश्राम करते हैं और ‘सरकार आपके द्वार’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए सीधे जनता की समस्याओं को सुनते हैं। यह “आम आदमी का मुख्यमंत्री” वाली छवि उनके नेतृत्व को समावेशी बनाती है।
पुष्कर सिंह धामी ने यह सिद्ध किया है कि समावेशी नेतृत्व का अर्थ केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उन योजनाओं में राज्य के हर भूगोल (मैदान और पहाड़) और हर वर्ग (युवा, महिला, बुजुर्ग) की भागीदारी सुनिश्चित करना है। उनके ‘विकल्प रहित संकल्प’ के विजन ने उत्तराखंड को 2025 तक देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने की मजबूत नींव रखी है।ण
