ध्रुवीकरण में फेल होने पर कांग्रेस का नया पैंतरा, बीजेपी अध्यक्ष महेंद्र भट्ट बोले— ‘झूठे आरोप लगाने वाले पहले अपना सिडकुल-IT पार्क का काला चिट्ठा देखें’

*UIIDB जमीन विवाद: सरकार ने आंकड़ों के साथ ‘कांग्रेस के ‘7 हजार बीघा’ वाले दावे की निकाली हवा..*

 

देहरादून: उत्तराखंड में राजनीतिक सरगर्मियां एक बार फिर चरम पर हैं। ‘शुद्धीकरण’ के नाम पर ध्रुवीकरण की राजनीति में नाकाम रहने के बाद अब विपक्ष पर देवभूमि की जनता को एक नए झूठ के जरिए गुमराह करने के आरोप लग रहे हैं।

कांग्रेस द्वारा हाल ही में फैलाए गए दावे की हवा सरकारी आंकड़ों ने निकाल दी है, कॉग्रेस का दावा था कि उत्तराखंड इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड (UIIDB) को सरकार ने 7 हजार बीघा जमीन खैरात में दे दी है। इस कथित झूठ पर सरकार के आधिकारिक आंकड़ों ने तमाचा जड़ा है
UIIDB को सिर्फ 45 एकड़ जमीन देने पर फैसला हुआ है…जो अभी दी नहीं गई है.. सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने मीडिया के सामने स्थिति स्पष्ट करते हुए वास्तविक आंकड़े पेश किए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, राज्य के विकास के लिए बोर्ड को अब तक सिर्फ 45 एकड़ (करीब 18 हेक्टेयर) जमीन दिए जाने के लिए कमिटी ने पहचान की है

शासन ने साफ किया है कि UIIDB को जमीन बेची नहीं जाती है, बल्कि नियमों के तहत केवल वही सरकारी जमीन ट्रांसफर की जाती है जो अनुपयोगी (Unused) पड़ी हो। इस जमीन का हस्तांतरण इसलिए किया जाता है ताकि बोर्ड इसका इस्तेमाल राज्य के विकास, रोजगार सृजन और राजस्व बढ़ाने के लिए कर सके, जिससे सीधे तौर पर देवभूमि के युवाओं और स्थानीय लोगों का भला हो।

*कैसे खोजी जाती है जमीन?*

शासन के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, अनुपयोगी सरकारी जमीनों की पहचान के लिए एक ‘ऑप्टिमल यूटिलाइजेशन कमेटी’ (Optimal Utilization Committee) काम करती है। यह कमेटी प्रदेश भर में ऐसी जमीनों की तलाश करती है और पूरी जांच-परख के बाद ही उसे बोर्ड को सौंपने की संस्तुति करती है।इस जमीन के जरिए UIIDB राज्य में रोजगार और राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी, वेलनेस, वेडिंग डेस्टिनेशन और शिक्षा जैसे सर्विस सेक्टर में देश-विदेश के बड़े निवेशकों को आकर्षित करने का काम कर रहा है।

*7 हजार बीघा का दावा पूरी तरह गलत: प्रमुख सचिव*

सरकार के प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने इस पूरे मामले पर बयान देते हुए कहा कि UIIDB को अब तक केवल 45 एकड़ जमीन ही मिली है। कांग्रेस द्वारा प्रचारित की जा रही 7 हजार बीघा जमीन की बात पूरी तरह निराधार और गलत है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि ऑप्टिमल यूटिलाइजेशन कमेटी के माध्यम से जिन अन्य जमीनों की पहचान की गई है, वे भी अभी प्रक्रिया में हैं और UIIDB को ट्रांसफर नहीं हुई हैं।

*कॉग्रेस का दावा*

कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष गणेश गोदियाल और पार्टी की ‘चार्जशीट’ समिति के अध्यक्ष करन माहरा ने यहां संवाददाताओं से कहा कि भाजपा सरकार राज्य की बेशकीमती सरकारी जमीन निजी हाथों में सौंपकर बड़े कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाना चाहती है।

 

*सांसद और प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का कांग्रेस पर तीखा हमला:*

 

‘पहले अपना रिकॉर्ड देखे विपक्ष’वहीं, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस के आरोपों को पूरी तरह ‘दुष्प्रचार’ करार दिया है। उन्होंने कहा कि UIIDB के नाम पर अभी सिर्फ 18 हेक्टेयर (45 एकड़) जमीन ही है।कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए भट्ट ने कहा, “कांग्रेस को वर्तमान सरकार पर झूठे आरोप लगाने से पहले अपने शासनकाल में हुए जमीन आवंटन का काला चिट्ठा देखना चाहिए।” उन्होंने कांग्रेस को याद दिलाते हुए पुराने मामलों का जिक्र किया, जिनमें शामिल हैं:IT पार्क की जमीन का विवादसिटी पार्क का लैंड यूज चेंज करने का मामलासाल 2006 में SIDCUL के माध्यम से सुपरटेक और प्लेनेट इंफ्रा को दी गई जमीनें

भाजपा का कहना है कि विकास कार्यों में रोड़ा अटकाने और जनता के बीच भ्रम फैलाने के लिए विपक्ष इस तरह के हथकंडे अपना रहा है, लेकिन देवभूमि की जागरूक जनता इनके बहकावे में आने वाली नहीं है।

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed